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सपा- कांग्रेस में ऐसे बनी बात
उत्तर प्रदेश

सपा- कांग्रेस में ऐसे बनी बात

2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव पर न केवल उत्तर प्रदेश या भारत बाल्कि विदेशों की भी नज़रें टिकी हुई है। यह सर्व विदित है कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी एवं समाजवादी पार्टी के अलावा किसी का जनाधार नहीं है। 2017 में सपा की सत्ता जाने के बाद 2019 और 24 का लोकसभा चुनाव हो या 2022 का विधानसभा चुनाव सभी में सपा और भाजपा की ही टक्कर रही और 2027 में भी पूरा चुनाव इन्हीं दोनों पार्टियों के मध्य होगा, जिसमें सपा - कांग्रेस के गठबंधन की भूमिका अहम होगी, दोनों पार्टियों में हुई बैठकों के बाद लगभग तय हो चुका है कि सीट बंटवारे का मसौदा एक सप्ताह में तय कर लिया जाएगा इसके लिए कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी को अधिकृत भी कर दिया गया है। भारत के सबसे बड़े प्रदेश यूपी में विधानसभा की कुल 403 सीटे हैं जिनमें 255 भाजपा ने जीती थीं जबकि सपा ने 101 एवं कांग्रेस के पास दो विधायक हैं। राजनीति का नियम है कि जो पार्टी सत्ता से बाहर हो जाती है उसका कार्यकर्ता अन्य दलों की ओर पलायन कर जाता है और यूपी में कांग्रेस 1989 के बाद सत्ता में वापसी नहीं कर पायी। इस साढे तीन दशक में पार्टी कार्यकर्ता ही नहीं नेता विहीन हो गई, हालांकि 2004 से 2014 तक केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही लेकिन यूपी में सपा, बसपा और भाजपा ने कब्जा जमा लिया। काफी समय तक सत्ता से बाहर रहने के बाद राहुल गांधी को महात्मा गांधी और अपने पिता राजीव गांधी का फार्मूला याद आया कि जनता उसी का साथ देती है जो जनता के बीच जाता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जब से जनता के बीच जाना प्रारंभ किया तब से कांग्रेस में नई जान आ गई है, जिसे देखकर भाजपा की बेचैनी और बढ़ती जा रही है। कांग्रेस को यह एहसास भी हो गया है कि बिना गठबंधन के भाजपा को सत्ता से हटाया नहीं जा सकता उधर समाजवादी पार्टी भी 10 वर्ष सत्ता से बाहर रहकर यह समझ गई है कि बिना गठबंधन के दोबारा सत्ता में आना आसान नहीं है। सपा को यह भी याद है कि 2017 में उसकी सत्ता आपसी फूट और पारिवारिक कलह के कारण गई थी। सपा भी भविष्य में अपनी उस गलती को नहीं दोहराएगी। वर्तमान हालात के आधार पर यह तो पक्का हो गया है कि दोनों दल मिलकर ही 2027 का चुनाव लड़ेंगे। जहां तक सीटों के बंटवारे का सवाल है तो दोनों दलों में इस बात पर भी मंथन हो चुका है कि अखिलेश को 2027 में यूपी की कुर्सी चाहिए तो राहुल गांधी की निगाह देश की बड़ी कुर्सी पर है। यदि 2027 में कांग्रेस सपा के साथ गठबंधन नहीं करती है तो 2029 में सपा भी कांग्रेस का साथ नहीं देगी, परिणामस्वरुप दोनों दल यदि बट गए तो सत्ता से मायूस रह जाएंगे और यदि यूपी में भाजपा की हैट्रिक लग गई तो सपा में भगदड मचने की आशंका है, क्योंकि नेता हो या कार्यकर्ता सभी सत्ता के लिए ही राजनीति करते हैं और कांग्रेस को यदि उत्तर प्रदेश का साथ नहीं मिला तो उसके लिए भी दिल्ली आसान नहीं होगी। जहां तक गठबंधन का सवाल है तो गठबंधन ही वह महान शक्ति है जिसके सहारे भाजपा सत्ता तक पहुंची और बीते वर्ष पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव में ममता बनर्जी ने इंडिया गठबंधन से हल्की सी दूरी बनाई थी कि सत्ता से बेदखल हो गयीं। जहां तक उत्तर प्रदेश में सपा -कांग्रेस के गठबंधन का सवाल है तो यह तो गठबंधन पक्का है और सीटों के समझौते पर भी 50 से 75 सीटों पर अंतिम समझौता होना तय माना जा रहा है, भले ही कुछ सीटों पर सपा अपने सिंबल पर कांग्रेस प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाये जो आपसी समझौते के आधार पर एक सप्ताह के अंदर लगभग तय हो जाएगा।

टूटी पुलिया पर सिंचाई विभाग कर रहा बड़ी दुर्घटना का इंतजार
उत्तर प्रदेश

टूटी पुलिया पर सिंचाई विभाग कर रहा बड़ी दुर्घटना का इंतजार

शाहजहांपुर। शारदा नहर खंड शाहजहांपुर के अंतर्गत शारदा नहर के किलोमीटर 36-37 के मध्य ग्राम मवैया पट्टी की पुलिया बुरी तरह से छतिग्रस्त हो गई है। गत दो वर्षों से लगातार उक्त पुलिया निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन शाहजहांपुर का सिंचाई जल संसाधन विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है।पुलिया की साइड बाल (मुंढेर) टूटकर नहर में गिर गई है और फर्श उखड़ गया है लेकिन विभाग कोई सुध नहीं ले रहा है। विदित हो इस नहर का निर्माण ब्रिटिश काल में हुआ था,उस समय भारी वाहनों का चलन नहीं था, केवल दो पहिया या हल्के वाहनों के साथ ही लहडू या बैलगाड़ी ही इस पुल से गुजरते थे।अब जमाना बदल गया है और ट्रैक्टर ट्राली के साथ ही अन्य भारी वाहन गन्ने से भरी ट्राली का भार सहन करने की शक्ति इस पुलिया में नहीं है। शारदा नहर खंड के अधिशासी अभियंता से गत दो वर्षों में दो बार नई पुलिया बनाने की मांग की जा चुकी है,लेकिन विभाग ने न तो कोई सर्वे कराया न ही शासन या विभाग को पुलिया निर्माण संबंधी कोई प्रस्ताव ही भेजा है।पुलिया का उखड़ा फर्श और टूटी साइड बाल किसी बडी दुर्घटना को दावत दे रही है।पुलिया के पास ही देवस्थान होने के कारण भारी वाहन मुड नहीं सकते हैं और ग्राम मवैया को जाने वाली सड़क भी पुलिया से 20 -25 मीटर दूर है।विभाग यदि चाहे तो ग्राम मवैया पट्टी को जाने वाली सड़क के सामने ही नई पुलिया(नहर पुल) का निर्माण कर सकता है। इन पुलियों की मियाद समाप्त होने के कारण ही उत्तर में पहाड़ीपुर तथा दक्षिण में दिउरिया की पुलियां नई बना दी गई हैं, लेकिन मवैया की पुलिया पर सिंचाई विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है।ग्राम मवैया पट्टी निवासी रामनरेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पुनः पत्र भेज कर पुलिया निर्माण की मांग की है।

माइनर में कुलाबे लगाने की मांग
उत्तर प्रदेश

माइनर में कुलाबे लगाने की मांग

शाहजहांपुर। तहसील तिलहर के ग्राम मवैया पट्टी निवासी रामनरेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर शारदा नहर खंड शाहजहांपुर के अधीन पहाड़ीपुर माइनर में कुलाबे लगवाने की मांग की है। ज्ञात हो यह माइनर लगभग 1970 में बनाई गई थी तभी से इसमें कुलाबे नहीं लगे थे और किसान माइनर का पानी आगे से रोक कर तथा नहर काटकर ही अपने खेतों की सिंचाई करते आ रहे थे,ऐसा लगभग 50 वर्षों से होता आ रहा है। विदित हो कि बीते दो दशक से माइनर की सफाई न होने से उसमें पानी आना बंद हो गया था जिससे माइनर के दोनों तरफ का शेष भाग अतिक्रमित हो गया था। गत वर्ष एक संस्था द्वारा मुख्यमंत्री तथा जिलाधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को पत्र देकर माइनर के सुचारु करने की मांग की गई थी जिस पर सहायक अभियंता प्रथम द्वारा माइनर के कुछ भाग की सफाई इत्यादि करवाकर फोटो खिंचवाकर किसी समाचार पत्र में छपवाए थे लेकिन माइनर में कुलाबे फिर भी नहीं लगवाये न ही पूरी माइनर की सफाई करवाई। शारदा नहर खंड के कर्मचारी एवं अधिकारी अब किसानों को कैनाल एक्ट के नोटिस भेज कर उनका आर्थिक शोषण करते हैं और कुलाबे लगाने की मांग करने वाले के विरुद्ध भड़काते हैं। बताया जाता है कि इस माइनर की सफाई कई वर्षों तक कागजों में ही दर्शीयी जाती रही और ठेकेदार का नाम पूछने पर उसका नाम तो नहीं बताया लेकिन इतना जरूर कहा कि वह विधायक जी का आदमी है। बताया जाता है कि जब यह माइनर बनी थी तो उसकी लंबाई 2.20 किलोमीटर थी और इसकी टेल को ग्राम पंचायत मवैया खास के मजरा गौटिया से आगे एक तालाब में गिराया गया था, लेकिन वर्तमान अधिकारी इसकी लंबाई को 2 किलोमीटर से भी कम होना दर्शाकर सरकार और विभाग को धोखा दे रहे हैं। कुलाबे लगाने के मांग कर्ता ने किसानों को कैनाल एक्ट के नोटिस भेज कर उनका आर्थिक शोषण करने वाले विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है।

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