ganga ka sandesh

भाजपा में हो गई दुर्दिनों की शुरुआत

Published: Sunday, August 30, 2026 at 5:53 AM
भाजपा में हो गई दुर्दिनों की शुरुआत
बरेली । जिस भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता में आने से पूर्व देश की जनता के अच्छे दिन आने का वादा किया था अब उसी के बुरे दिन आने प्रारंभ हो गए हैं। गत 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर मंतर से प्रारंभ हुए काकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बाद तो भाजपा में ऐसी अप्रत्याशित घटना घटित हुई जिसको भाजपा के बड़े नेता यह कहते थे कि हमारे यहां इस्तीफे नहीं होते हैं , उनको अपने मंत्री का इस्तीफा करना पड़ा। भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को संसद की कार्रवाई से मुंह छुपाना पड़ा, प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री का मानसून सत्र से गायब होने को देश की जनता ही नहीं विदेशों ने भी गंभीरता से लिया है और संघ प्रमुख मोहन भागवत को अपनी विदेश यात्रा में विरोध का सामना करना पड़ा। रही सही कसर एथेनॉल ने पूरी कर दी, तो चीनी के दामों में आई बंपर तेजी ने भाजपा सरकार की चूलें दिला दी। जिस राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर भाजपा सत्ता में आई थी उसी अयोध्या के राम मंदिर में हुई चंदा चोरी और चोरी के मुख्य रूप से जिम्मेदार ट्रस्टियों को बचाने के लिए केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों ने भाजपा की रही सही कसर भी पूरी कर दी। न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश की जनता की नजर में भाजपा का असली चेहरा अब सामने आ गया है।
सोशल मीडिया में एक कहावत आजकल तेजी से वायरल हो रही है कि जब किसी के बुरे दिन आते हैं तो ऊंट पर बैठे व्यक्ति को भी कुत्ता काट लेता है , वही कहावत आजकल बीजेपी पर लागू हो रही है। भाजपा ने सत्ता में आने से पूर्व लगभग तीन दर्जन छोटे-छोटे दलों को जोड़कर अपना कुनबा तैयार किया था ईडी और सीबीआई के माध्यम से विपक्षी दलों में भय का वातावरण बनाकर अन्य दलों के कई बड़े-बड़े नेताओं को अपनी पार्टी में सम्मिलित कर इतना बड़ा साम्राज्य स्थापित कर दिया कि भाजपा देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। पार्टी न केवल कुनबे से बड़ी हुई बल्कि भाजपा संगठन के पास देश के अन्य राजनीतिक दलों की तुलना में सर्वाधिक फंड भी जमा है । संघ के भी आलीशान कार्यालय बन गए हैं ,भाजपा के केंद्रीय कार्यालय से लेकर प्रदेश और जिला स्तरीय कार्यालयों की काया पलट गयी,आज उस भाजपा को अपनी सत्ता बचाने के लिए नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं । सहयोगी दल भी आंखें दिखा रहे हैं, केंद्र एवं राज्यों के मंत्रिमंडल में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों की नहीं चल रही। यूपी के राज्यपाल ने तो अपने ही मुख्यमंत्री के क्षेत्र में जाकर वहां पर 50 कमियां निकाल दींं जो पार्टी के बुरे दिन आने का ही संकेत है।
- Advertisement - Article Middle Banner
Share: