राजनीति
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पप्पू बन गया पापा
Published: Monday, August 24, 2026 at 3:01 PM
हरिद्वार। राहुल गांधी वर्तमान भारत के जननायक बनकर उभर रहे हैं । देश की जनता उनको जितना पसंद कर रही है उनके विरोधी और विशेष कर वह शक्तियां जो देश को आजाद कराने वाले महात्मा गांधी को बर्दाश्त नहीं कर पायीं उनकी आंखों में राहुल गांधी कंकर बनकर कसक रहे हैं । नेहरू परिवार की पूरी पृष्ठभूमि देश और समाज के हित की रही है, इस परिवार ने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के रूप में शहादत देकर इस देश को अपने लहू से सींचा है । राहुल गांधी के पिता स्वर्गीय राजीव गांधी भी सुरक्षा घेरा तोड़कर आम जनता के बीच जाकर जनसामान्य से मिलते थे, उसी तर्ज पर राहुल गांधी भी कई शहरों और प्रदेशों में शो कर चुके हैं । उत्तराखंड , राजस्थान, उत्तर प्रदेश और 22 अगस्त को महाराष्ट्र के पुणे में हुए कार्यक्रम के बाद उनकी सुरक्षा के बारे में सोचा जाना चाहिए कि जो नेता आम जनता के बीच जाकर अपना मंच साझा करवा रहा है उसकी सुरक्षा में सेंध लगाई जा सकती है ? राहुल गांधी को स्वयं , उनकी सुरक्षा में लगे दल एवं कांग्रेस को इस विषय पर गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए।
राहुल गांधी को पप्पू घोषित करने में सत्तारूढ़ दल के एक नेता ने आम जनता के करों से प्राप्त हजारों करोड़ों की धनराशि खर्च कर डाली, वह खानदानी नेता पप्पू न रहकर अब भारत की जनता विशेष कर युवा पीढ़ी (जिसे देश का भविष्य कहते हैं) का पापा (संरक्षक)बन गया है । रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने कहा था "जब-जब होइ धर्म की हानी, बाढ़हिं असुर ,अधम ,अभिमानी। तब- तब प्रभु धरि विविध शरीरा, हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा"। जब-जब पृथ्वी पर धर्म कम होता है और पापी लोग ताकतवर होते हैं ,तब -तब भगवान अलग-अलग रूप लेकर अच्छे लोगों का दुख दूर करते हैं । मानस की इस चौपाई को यदि वर्तमान राजनीतिक परिपेक्ष से जोड़कर देखा जाए तो बिल्कुल स्पष्ट हो रहा है कि वर्तमान केंद्र और राज्य सरकार ने एक अपंजीकृत संगठन के साथ सांठ-गांठ कर अयोध्या के उस राम मंदिर में खुली डकैती डाली जिससे देश ही नहीं पूरे विश्व में रह रहे करोड़ों राम भक्तों की आस्था जुडी थी। विडंबना देखें कि जिस प्रदेश का मुखिया स्वयं धार्मिक स्वरूप धारण कर सत्ता का संचालन कर रहा है उसने धर्म स्थल के डकैतों को कितनी सतर्कता से बचाया , इससे बड़ी धर्म की हानि कोई हो नहीं सकती।
जिस सरकार ने प्रतिवर्ष दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया हो वह पेपर लीक होने का रिकॉर्ड बनाने में लगी है। उसी की राज्य सरकारें स्कूलों में ताले लगवा रहीं तथा यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलाने की घोषणाएं कर रही हैं और यदि छात्र अपने हक की मांग करें तो उन पर लाठियां, आंसू गैस और बंदूकों के छर्रों की बौछार की जा रही है। सरकार संसद में न जाए और विपक्षी दलों की सरकारें तोड़ने में अपनी पूरी ताकत लगा दे, किसी अपराध के विरुद्ध थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए विपक्षी नेता को सात- आठ घंटे धरना देना पड़े , इससे बड़ी तानाशाही और हठ धर्मिता कोई हो नहीं सकती। हमारे देश की जमीन पर कोई पड़ोसी देश कब्जा कर ले और सरकार कहे कि हमारी एक इंच जमीन किसी ने नहीं कब्जायी, ऑपरेशन सिंदूर में हमारे जवान शहीद हो जाएं और हमारी सरकार कह दे कि हमारी कोई जनहानि नहीं हुई है, ऐसी झूठी सरकार को आखिर इस देश की जनता और कब तक बर्दाश्त करेगी ? इतिहास गवाह है कि हमारे देश में जब-जब तानाशाही का तांडव हुआ कोई न कोई राजनेता अवश्य जन सामान्य का मसीहा बनकर उभरा और उसने देश को तानाशाही के चुंगल से मुक्त कराकर संविधान सम्मत सत्ता को स्थापित किया। संविधान की जय हो , भारत माता की जय हो।
राहुल गांधी को पप्पू घोषित करने में सत्तारूढ़ दल के एक नेता ने आम जनता के करों से प्राप्त हजारों करोड़ों की धनराशि खर्च कर डाली, वह खानदानी नेता पप्पू न रहकर अब भारत की जनता विशेष कर युवा पीढ़ी (जिसे देश का भविष्य कहते हैं) का पापा (संरक्षक)बन गया है । रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने कहा था "जब-जब होइ धर्म की हानी, बाढ़हिं असुर ,अधम ,अभिमानी। तब- तब प्रभु धरि विविध शरीरा, हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा"। जब-जब पृथ्वी पर धर्म कम होता है और पापी लोग ताकतवर होते हैं ,तब -तब भगवान अलग-अलग रूप लेकर अच्छे लोगों का दुख दूर करते हैं । मानस की इस चौपाई को यदि वर्तमान राजनीतिक परिपेक्ष से जोड़कर देखा जाए तो बिल्कुल स्पष्ट हो रहा है कि वर्तमान केंद्र और राज्य सरकार ने एक अपंजीकृत संगठन के साथ सांठ-गांठ कर अयोध्या के उस राम मंदिर में खुली डकैती डाली जिससे देश ही नहीं पूरे विश्व में रह रहे करोड़ों राम भक्तों की आस्था जुडी थी। विडंबना देखें कि जिस प्रदेश का मुखिया स्वयं धार्मिक स्वरूप धारण कर सत्ता का संचालन कर रहा है उसने धर्म स्थल के डकैतों को कितनी सतर्कता से बचाया , इससे बड़ी धर्म की हानि कोई हो नहीं सकती।
जिस सरकार ने प्रतिवर्ष दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया हो वह पेपर लीक होने का रिकॉर्ड बनाने में लगी है। उसी की राज्य सरकारें स्कूलों में ताले लगवा रहीं तथा यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलाने की घोषणाएं कर रही हैं और यदि छात्र अपने हक की मांग करें तो उन पर लाठियां, आंसू गैस और बंदूकों के छर्रों की बौछार की जा रही है। सरकार संसद में न जाए और विपक्षी दलों की सरकारें तोड़ने में अपनी पूरी ताकत लगा दे, किसी अपराध के विरुद्ध थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए विपक्षी नेता को सात- आठ घंटे धरना देना पड़े , इससे बड़ी तानाशाही और हठ धर्मिता कोई हो नहीं सकती। हमारे देश की जमीन पर कोई पड़ोसी देश कब्जा कर ले और सरकार कहे कि हमारी एक इंच जमीन किसी ने नहीं कब्जायी, ऑपरेशन सिंदूर में हमारे जवान शहीद हो जाएं और हमारी सरकार कह दे कि हमारी कोई जनहानि नहीं हुई है, ऐसी झूठी सरकार को आखिर इस देश की जनता और कब तक बर्दाश्त करेगी ? इतिहास गवाह है कि हमारे देश में जब-जब तानाशाही का तांडव हुआ कोई न कोई राजनेता अवश्य जन सामान्य का मसीहा बनकर उभरा और उसने देश को तानाशाही के चुंगल से मुक्त कराकर संविधान सम्मत सत्ता को स्थापित किया। संविधान की जय हो , भारत माता की जय हो।
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