राजनीति
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सत्ता पर गहराता संकट
Published: Tuesday, August 18, 2026 at 6:19 AM
समय और सत्ता दोनों परिवर्तनशील होते हैं, एक पुरानी कहावत है कि 12 वर्ष बाद बदलाव आता ही है। इतिहास का समय देखें या भारत की सत्ता, तीसरे कार्यकाल में बदलाव देखे गए हैं। प्रधानमंत्रियों में सर्वाधिक कार्यकाल जवाहरलाल नेहरू लगभग 17 वर्ष, इंदिरा गांधी लगभग 16 वर्ष, नरेंद्र मोदी 26 मई 2014 से अब तक, जबकि डॉ. मनमोहन सिंह का कार्यकाल 10 वर्ष का रहा। मुख्यमंत्रियों में ममता बनर्जी, शीला दीक्षित और लालू प्रसाद यादव ने 15-15 वर्ष की पारी खेली। प्रकाश सिंह बादल 19 साल, भजनलाल लगभग 12 वर्ष, शिवराज सिंह चौहान साढे 16 वर्ष तो नरेंद्र मोदी भी लगभग साढे 12 वर्ष गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। सत्ता के समय पर निगाह डाली जाए तो तीसरा कार्यकाल सभी पर भारी पड़ा और सत्ता में बदलाव हुआ। इन सब में लंबी पारी खेली नीतीश कुमार ने जिन्होंने 19 वर्ष में 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, इनमें कोई भी राजनेता दो दशक का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। अब तक हुए राजनेताओं के कार्यकाल में बदलाव का मुख्य कारण उनका अहंकार रहा है,जब भी किसी की सत्ता पुरानी होती है तो नेता में अभियान अवश्य आता है जो उसके पतन का कारण बनता है। केंद्र और यूपी की वर्तमान सरकार पर भी यही फार्मूला लागू हो रहा है। दोनों जगह सत्ता की उलट - पलट का खेल चल रहा है,यह अधिसंख्य जनता की नाराजगी का कारण है। जिस प्रकार केंद्र की सत्ता से कोई वर्ग खुश नहीं है उसी प्रकार का वातावरण उत्तर प्रदेश में भी है। जहां तक सरकारों में घोटालों का सवाल है तो यह तो सत्ता के स्वभाव में सम्मिलित हो गए हैं लेकिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में खुलेआम हुई दान के धन की लूट ने केंद्र तथा यूपी की दोनों सरकारों की चूलें ढीली कर दी हैं जो सत्ता में बदलाव का मुख्य कारण बनेगा और संघ के संरक्षण में हुए इस दान चोरी कांड ने भाजपा को एक लंबे समय तक सत्ता से दूर होने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
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